संग्रहालय का इतिहास (Museum History)

प्रारांभिक रूप से 1962 में ट्रांसपोर्ट संग्रहालय खोलने की सोची गयी, हालांकि 1970 में ट्रांसपोर्ट संग्रहालय के खोलने के विचार को सदृढ़ रूप से मिस्टर माइकल ग्राहम स्टोव, जो कि एक रेल प्रेमी थे, के सलाह और देख-रेख में मिला। उस समय के भारतीय राष्ट्रपति श्री वी.वी.गिरी ने रेल ट्रांसपोर्ट संग्रहालय की नीव इसके वर्तमान जगह चाणक्यपुरी, नई दिल्ली में 7अक्टूबर 1971 को रखी। ट्रांसपोर्ट संग्रहालय को एक बड़े परिसर में विकसित करने की योजना थी जिसके अन्तर्गत भारत के रेलवे, रोड, हवाई यातायात और जल यातायात के इतिहास और धरोहरों को शामिल करना था, जो बाद में वर्ष 1995 में एक पूर्ण राष्ट्रीय रेल संग्रहालय के रूप में विकसित हुआ। देश में अपनी तरह का पहला, राष्ट्रीय रेल संग्रहालय 11एकड़ से अधिक भूमि क्षेत्र में फैला है और एक अच्छी तरह से बना हुआ अष्टकोणीय भवन भी है जिसमें छः प्रदर्शनी दीर्घा है और एक बड़ा खुला प्रदर्शनी क्षेत्र है जो रेलवे यार्ड के वातावरण जैसा अनुकरण करवाता है। संग्रहालय का उद्घाटन माननीय रेलवे मंत्री श्री कमलापति त्रिपाठी द्वारा 1फरवरी 1977 को किया गया, इस शुभ अवसर पर भारत के राष्ट्रपति श्री वी.वी.गिरी और श्री के. हनुमनथाइया ने भाषण दिया। श्री एम. श्री निवासन, महानिदेशक, आर.डी.एस.ओ., लखनऊ को लोगों को धन्यवाद देने का कार्य दिया गया। राष्ट्रपति, रेलवे मंत्री, के अलावा निम्नलिखित लोग भी प्रस्तुत थेः श्री वी.एस. डी.बालीगा, सदस्य (स्टाफ), श्री के.एस. सुंदर राजन, वित्त आयुक्त, एन.एस. स्वामीनाथन, सदस्य (परिवहन), एच.एम.चटर्जी, सदस्य (यांत्रिक), श्री एम.एन. बेरी, जनरल मैनेजर, उत्तरीय रेलवे, एम. श्रीनिवासन, महानिदेशक, आर.डी.एस.ओ., लखनऊ।



संग्रह (collection)

संग्रहालय के संग्रह में रेलवे के वास्तविक आकार के और छोटे आकार के प्रदर्शनी वस्तुएं हैं और देश में अन्य रेल घटकों का सबसे बड़ा संग्रह है। संग्रहालय में भारतीय उपमहाद्दीप के लोकोमोटिव और रजवाड़ों के कोच हैं। पटियाला राज्य मोनो रेल और जॉन मॉरिश दमकल इंजन दुनिया में अपनी तरह की नायाब प्रदर्शित वस्तु है।



संरक्षण (Preservation)

संग्रहालय में दस्तावेज, नक्शे, चित्र, किताबें और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं जो भारतीय रेलवे के 160 से अधिक वर्षों के इतिहास से संबंधित है।



रेस्टोरेशन (Restoration)

संग्रहालय में देश भर से एकत्रित लोहे व इस्पात से बनें भाप के इंजन और लकड़ी से बनें रेल डिब्बे भी है। संग्रहालय में इन प्रदर्शित इंजन और डिब्बों का निरंतर मरम्मत की गतिविधि चलती रहती है। इन गतिविधियों में कुछ भारतीय रेलवे के विभिन्न कार्यशाला/इकाइयों द्वारा किये जाते हैं।



आधुनिकीकरण (Modernization)

संचार के माध्यमों में बदलाव को मद्देनजर रखते हुए, संग्रहालय अपने आगामी कार्यों के संचालन के लिए नियमित रूप से उन्नयन की प्रक्रिया होती रहती है। संग्रहालय में रेल सिम्यूलेटर की संख्या शायद दुनिया में सबसे अधिक है। अत्याधुनिक 3डी आभासी वास्तविकता आगंतुकों को वापस पुराने समय में ले जाती है। अंतःदीर्घा में डिजिटल और मोबाइल तकनीकों का उपयोग यहाँ की यात्रा को इंट्रेक्टिव, शैक्षिक और आकर्षक बनाती है। संग्रहालय में मोबाइल ऐप और वेब साइट की एक सारणी है जो एक रेल प्रेमी को प्रदर्शित वस्तुओं से जुड़ने का मौका देती है। 3डी आभासी पर्यटन और इंडोर पोजिशनिंग सिस्टम आगंतुकों को उनकी पसंद की सामग्री का उपयोग करने में सहायक हो, ऐसी व्यवस्था भी भविष्य में की जाने वाली है। संग्रहालय में एक रेल समुदाय बनाने का प्रयोजन है जो लोगों को संग्रहालय में सुधार के लिए अपनी टिप्पणी और विचारों के योगदान का स्वागत करेगा।